श्रीकृष्णचरितसुधा की आरती

श्रीकृष्णचरितसुधा की आरती

आरति श्रीहरिचरितसुधा की।
हरनि कलेस कुमति बसुधा की।।

कहत सुनत समुझत सुख देनी।
बिधि रिधि सिधि संबोधि निसेनी।।
सिव सुभ सीस गंग सुचि बेनी।
दलनि कलुष कलि काम छुधा की।।
आरति श्रीहरिचरितसुधा की।।01।।

बर बेदान्त ब्रह्म मुख बानी।
सांख्य जोग जुत भगति अमानी।।
सुत जुत ब्यास समास बखानी।
मुकुति धार मुख काम दुधा की।।
आरति श्रीहरिचरितसुधा की।।02।।

भंजनि भ्रम तम दुति दिनेस की।
कर्म सुपथ कीरति ब्रजेस की।।
तन मन धन सरबस निसेष की।
मर्दनि मुख मद मोह मुधा की।।
आरति श्रीहरिचरितसुधा की।।03।।