अखण्ड-पाठ हेतु सम्पुट मंत्र

श्रीकृष्णचरितसुधा के अखण्ड-पाठ हेतु सम्पुट-मंत्र 

1.  अचर     जड़    चेतन     प्रानी। बन्दउँ   कृष्नतत्व    मय   जानी।।
व्रज0/दो0-12/चौ0-12
2. स्याम चरित  नासक  सब सूला। सकल  सदन  सुख  मंगल मूला।।
व्रज0/24/03
3. सुमिरत जाहि जाहिं जग  बाधा। परम    प्रेम   गुन   मूरति   राधा।।
व्रज0/257/10
4. हरन   सकल   भवगत   संदेहा। स्याम  चरित   सब   मंगल  गेहा।।
व्रज029/06
5. राधेस्याम  धाम   धन   धी   के। पुरवहु  सकल  मनोरथ  जी   के।।
व्रज0/270/11
6. बनइ न भूप  भगति  जग साधे। बिनु     बृषभानुसुता    अवराधे।।
व्रज0/270/12
7. हे   गोबिन्द    कृष्न    गिरधारी। जगन्नाथ     मैं    सरन    तिहारी।।
द्वारिका0/05/07
8. अब मम सुगति कान्ह कर तोरे। दीनदयाल    हरहु     दुख    मोरे।।
द्वारिका0/05/08
9. मैं  तव  सरन  सिष्य  गिरधारी। निज  निदेस   भ्रम  भंजहु  भारी।।
प्रबोध0/08/03
10. कृपासिन्धु  बिनवउँ  कर जोरी। पूजहु    हृदय     लालसा    मोरी।।
प्रबोध0/64/08
11. मन  कामना   एक   प्रभु  मोरे। पूजहि     परम     अनुग्रह    तोरे।।
व्रज0/208/08
12. जिन्ह जदुनाथ बॉंह गहि राखी। तिन्हहिं सकल सुख संकर साखी।।
सभा0/179/04