श्रीकृष्णचरितसुधा
महाकाव्य
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सूचनाएं
१. ग्रन्थ का प्रकाशन वर्ष-
2024
२. आई० एस० बी० एन० (ISBN-13)-
978-93-5811-123-1
३ . रचनाकार एवं प्रकाशक-
श्री राजेन्द्र प्रसाद "निसेष"
कर्मयोगी साहित्यालय
48-गिंदन खेड़ा, अमौसी, लखनऊ-226008
४ . प्रकार-
मूल-पाठ भावार्थ सहित
५. शैली-
प्रबन्ध-काव्य
(मुख्य छन्द- दोहा-चौपाई)
६. ग्रन्थ-योजना-
अध्याय संख्या आठ-
१. व्रजपर्व, २. प्रयाणकपर्व,
३. द्वारिकापर्व, ४. सभापर्व,
५. उद्योगपर्व, ६. प्रबोधपर्व,
७. जयपर्व, ८. शान्तिपर्व ।
७. मुद्रक-
बर्फानी इंटरप्राइजेज, हज़रत गंज, लखनऊ-1
मोबाइल- 9889812222
८. प्रचारक एवं वितरक-
१ . श्री राजेंद्र प्रसाद "निसेष"
मो०- 7054158526, 8840346071
ई० मेल०- nisheshrajendra@gmail.com
२ . स्वामी लखनानन्द सरस्वती
अहिनिवार धाम, राती,
निगोहा, लखनऊ
मो०- 7754011956
३ . यूनिवर्सल बुक डिपो,
कपूरथला, अलीगंज, लखनऊ
मो०-9696762311
४. प्रकाश बुक डिपो,
अमीनाबाद, लखनऊ
मो०-9452491305
६. घनश्याम बुक सेलर,
जन्मभूमिमंदिर परिसर, मथुरा
मो०-8445403040
७. खंडेलवाल ग्रंथालय,
वृन्दावन, मथुरा
मो०/फोन-9997977551, 0565-2443101
श्रीकृष्णचरितसुधा (महाकाव्य)
अनुक्रमणिका
1. व्रज पर्व (प्रथमांजलि)
1. मंगलाचरण
2. राधा-माधव व सरस्वती वंदना तथा काव्य-हेतु
3. विश्वकल्याण में निरत सज्जनों की तथा भगवान शिव की वंदना
4. माता तथा मातृभूमि की वंदना
5. कृषक तथा सैनिक-वर्ग की वंदना
6. वैद्य-समुदाय की वंदना
7. गुरु-वंदना
8. ईश्वर-स्वरूप प्राणिमात्र की वंदना व अद्वैत का निरूपण
9. गुरु-महत्ता व श्रीकृष्णचरित वर्णन का उद्देश्य
10. श्रीकृष्ण-कथा का महत्त्व व व्यासदेव की वंदना
11. वैशम्पायन व शुकदेवजी की वंदना
12. आदिकवि वाल्मीकिजी व तुलसीदासजी की वंदना
13. कलियुग के संतजनों की वंदना
14. गृहस्थ-सज्जनों की वंदना
15. सूरदासजी तथा मीराबाईजी की वंदना
16. संत रविदासजी की वंदना
17. परमात्मा की अनन्तता
18. आत्म-लघुता का निवेदन
19. श्रीकृष्ण-कथा की महिमा
20. श्रीकृष्णचरित में मानव-समता तथा समदर्शिता
21. माता देवकी, रोहिणी, वसुदेवजी व नन्दरायजी की वंदना
22. माता यशोदा तथा कृष्ण के बालसंगी गोप-गोपिकाओं की वंदना
23. व्रजवासियों, उद्धव, अर्जुन, सुदामा, पृथापुत्रों, विदुरजी, भीष्मजी, द्रौपदी व बलभद्रजी की वंदना
24. सुभद्राजी, रुक्मिणीजी सहित जामवंती-सत्यभामा आदि अन्य कृष्ण-पत्नियों, मथुरा, द्वारिका व वृन्दावन की उसके निवासियों सहित तथा समस्त सचराचर की वंदना
25. राधेश्याम युगल-विग्रह की चरण-वंदना
26. श्रीकृष्णचरितसुधा का रूपक
27. श्रीकृष्णचरितसुधा का प्राकट्य
28. श्रीकृष्णचरितसुधा काव्य-रस-प्रवाह
29. श्रीकृष्णचरितसुधा का रचना-समय
30. नैमिषारण्य में ऋषि शौनक के सतसंग-सत्र में मुनि उग्रश्रवा का आगमन
31. ऋषियों का कृष्ण चरित सुनाने का आग्रह
32. कथा-उपक्रम व द्वारिका में यदुवंशियों का गृहयुद्ध
33. श्रीकृष्ण की इहलोक-लीला का समापन
34. परीक्षित-प्रसंग
35. शुकदेवजी से राजा परीक्षित का भागवत सुनाने का निवेदन
36. श्रीकृष्ण चरित व भागवत सार
37. जनमेजय का नागयज्ञ
38. वैशम्पायन का द्वैपायन रचित ‘जय’ तथा ‘हरिवंश’ सुनाना
39. कथा प्रारम्भ
40. यदुवंष का वर्णन
41. मथुरा के यादवों का संघीय गणतंत्र
42. जरासंध का आक्रमण व कंस का पराक्रम
43. कंस-विवाह व उसके द्वारा यादवों की प्रताड़ना व उग्रसेन का वन्दीत्व
44. कंस की दिग्विजय व उसके धर्म विरोधी कृत्य
45. वसुदेव व देवकी का विवाह व गृहनिग्रह
46. वसुदेव-देवकी के छः पुत्रों का जन्म व कंस द्वारा उनकी हत्या
47. रोहिणीजी का नन्दजी के साथ मथुरा आना व पुनः व्रज लौटना
48. बलराम जन्म
49. देवकी का पुनः गर्भ-धारण, कंस का भय व उसके अत्याचार
50. श्रीकृष्ण-जन्म व मथुरा से निष्क्रमण
51. माता यशोदा व नन्दजी का त्याग
52. देवकी का शोक व कंस द्वारा यशोदाजी की कन्या के वध का प्रयास
53. कंस द्वारा क्षमा याचना व देवकी का उसे क्षमा करना
54. वसुदेव दम्पत्ति की बंधन-मुक्ति
55. भयाक्रांत कंस का शिशु-हत्या का आदेश
56. गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव
57. कंस का संदेह तथा उसका पूतना व तृणावर्त को गोकुल भेजना
58. नन्दजी का कर लेकर मथुरा जाना तथा वसुदेवजी से भेंट
59. पूतना-वध का प्रसंग
60. भगवान शिव का श्रीकृष्ण के दर्शन हेतु गोकुल-प्रस्थान व तृणावर्त-वध
61. भगवान शिव का गोकुल-आगमन व श्रीहरि के दर्शन करना
62. गर्ग मुनि द्वारा गोकुल में कृष्ण का नामकरण
63. बाल-माधुर्य
64. शकट-भंजन व बाल-लीला
65. ऊखल बंधन
66. बाल-सौंदर्य व माखन लीला
67. गो-चारण व वत्सासुर व बकासुर का वध तथा नन्दजी का व्रजवासियों सहित गोकुल से वृन्दावन-गमन
68. वृन्दावन की शोभा
69. श्रीकृष्ण द्वारा अघासुर तथा बलरामजी द्वारा धेनुकासुर का वध
70. कालिय मान-मर्दन का प्रसंग
71. बलराम द्वारा प्रलम्बासुर वध
72. श्रीकृष्ण की शोभा व वेणु-गीत
73. श्रीकृष्ण व राधाजी की भेंट
74. श्रीकृष्ण द्वारा इन्द्रपूजा का विरोध
75. गोवर्द्धन-पूजा
76. वर्षा के प्रकोप से श्रीकृष्ण द्वारा व्रज की रक्षा हेतु गोवर्द्धन-धारण
77. व्रज में होलिकोत्सव
78. शरद-वर्णन
79. महारास-लीला
80. अरिष्टासुर का वध तथा कंस का भय
81. यदुवंशियों की सभा में कंस का वसुदेव पर आक्षेप व पुनः गृहनिग्रह करना तथा अक्रूर को व्रज जाने का आदेश
82. केशी वध
83. राधिकाजी से श्रीकृष्ण का कंस-वध हेतु परामर्श
84. अक्रूर का व्रजगमन व श्रीकृष्ण-बलराम से उनकी भेंट
85. अक्रूर की नन्द-यशोदा से कंस के अत्याचारों की चर्चा तथा यशोदाजी से श्रीकृष्ण-बलराम को मथुरा भेजने का आग्रह
86. श्रीकृष्ण का मथुरा-प्रस्थान तथा व्रजवासियों का विषाद व मार्ग में राधिकाजी से अंतिम भेंट
87. अक्रूरजी को मार्ग में ज्ञान-प्राप्ति तथा श्रीकृष्ण का मथुरा-आगमन
88. नगर-भ्रमण व कुब्जा पर कृपा
89. श्रीकृष्ण द्वारा शिव-धनुष तोड़ने पर कंस की चिन्ता
90. कुबलियापीड के वधोपरांत श्रीकृष्ण-बलराम का रंगभूमि में प्रवेश
91. चाणूर, मुष्टिक आदि अनेक मल्लों का वध
92. कंस-वध
93. वसुदेव, देवकी व उग्रसेन की कारागार से मुक्ति
94. उग्रसेन राज्यारोहण
95. नन्दजी का व्रज लौटना
96. श्रीकृष्ण-बलराम का विद्यारम्भ संस्कार व अवंतिकापुरी-प्रस्थान
97. ऋषि सांदीपनि से भेंट, ऋषि-उपदेश, योग्य गुरु व शिष्य के लक्षण
98. श्रीकृष्ण व सुदामा की भेंट एवं संवाद
99. ऋषि घोर-आंगिरस से भेंट
100. श्रीकृष्ण-सुदामा का समिधा-आनयन व गुरु-दक्षिणा-प्रसंग
101. उद्धव के साथ श्रीकृष्ण-बलराम का मथुरा हेतु प्रस्थान
102. उग्रसेन का राजसभा बुलाना तथा राजा पाण्डु की मृत्यु का समाचार देना
103. श्रीकृष्ण का अक्रूरजी को हस्तिनापुर भेजना
104. उद्धव का महान भ्रम तथा समाधान हेतु श्रीकृष्ण का उन्हें संदेश देकर वृन्दावन भेजना
105. उद्धव का वृन्दावन-गमन तथा वसुदेव-यशोदाजी से भेंट
106. उद्धव-गोपी-संवाद
107. उद्धव का मथुरा लौटना
2. प्रयाणक पर्व (द्वितीयांजलि)
108. अक्रूर का मथुरा लौटना तथा हस्तिनापुर के समाचार देना
109. जरासंध का मथुरा पर आक्रमण
110. बलरामजी का गदायुद्ध व जरासंध का पराभव
111. राजाओं का जरासंध से कालयवन को मथुरा पर आक्रमण हेतु आमंत्रित करने पर विचार करना
112. यादवों की सभा में विकद्रू का भाषण
113. श्रीकृष्ण का स्वयं के मथुरा छोड़ने तथा द्वारिका-निर्माण का प्रस्ताव
114. श्रीकृष्ण व बलरामजी का दक्षिण-प्रस्थान
115. परशुरामजी से भेंट तथा गोमंतक-पर्वत की ओर प्रस्थान
116. देवताओं का श्रीकृष्ण को चक्रादि आयुध देना
117. गरुड़ द्वारा नगर निर्माण हेतु कुशस्थली का चयन व विश्वकर्माजी द्वारा द्वारिका-निर्माण का प्रारम्भ
118. जरासंध का युद्ध व गोमंत गिरि-दाह
119. राजा शृगाल का वध
120. श्रीकृष्ण-बलराम का लौटना तथा मथुरावासियों का द्वारिका-स्थानान्तरण
121. कालयवन का मथुरा पर आक्रमण व मुचुकुन्द द्वारा उसका वध होना
3. द्वारिका पर्व (तृतीयांजलि)
122. श्रीकृष्ण-बलराम का द्वारिका-आगमन तथा बलराम विवाह
123. द्वारिका का वैभव तथा ऋषि सांदीपनि की राजगुरु के पद पर प्रतिष्ठा
124. रुक्मिणी-मंगल
125. स्यमंतक-मणि कथा
126. युधिष्ठिर का राज्याभिषेक व बलरामजी का हस्तिनापुर गमन
127. जामवन्ती व सत्यभामा से श्रीकृष्ण का विवाह
128. नारदजी का द्वारिका-आगमन तथा श्रीकृष्ण की दिनचर्या का अवलोकन
129. दुर्योधन का लाक्षागृह-षड़यंत्र व श्रीकृष्ण-बलराम का हस्तिनापुर गमन
130. शतधन्वा का वध व बलरामजी का मिथिला-प्रवास
131. द्वारिका में इन्द्र का आगमन व नरकासुर-वध का श्रीकृष्ण से अनुरोध
132. प्राग्ज्योतिष्पुर पर आक्रमण तथा मुर तथा नरकासुर का वध
133. श्रीकृष्ण का अमरावती-गमन तथा इंद्र की पराजय व पारिजात-हरण
134. द्रौपदी का स्वयंवर व विवाह
135. विदुर से पाण्डवों का समाचार पाकर धृतराष्ट्र का भीष्मादि से परामर्श करना तथा विदुर को काम्पिल्य भेजना
136. पाण्डवों का द्रौपदी व श्रीकृष्ण-बलराम सहित हस्तिनापुर आना
137. राज्य का विभाजन तथा युधिष्ठिर का राज्याभिषेक
138. इन्द्रप्रस्थ निर्माण व श्रीकृष्ण का द्वारिका गमन
139. प्रद्युम्न-शुभांगी विवाह व अनिरुद्ध का जन्म
140. बलरामजी का क्रोध व साम्ब का दुर्याेधन-पुत्री लक्ष्मणा से विवाह
141. बलरामजी द्वारा दुर्योधन को गदायुद्ध की शिक्षा देना
142. अर्जुन का प्रभास-प्रवास व श्रीकृष्ण से भेंट
143. सुभद्राहरण व विवाह
144. खाण्डव-दाह
145. मयासुर द्वारा माया-सभा के निर्माण का प्रारंभ
146. अभिमन्यु तथा द्रौपदी-पुत्रों का जन्म
147. श्रीकृष्ण का द्वारिका गमन
4. सभा पर्व (चतुर्थांजलि)
148. यदुवंशियों सहित वसुदेवजी का कुरुक्षेत्र प्रस्थान
149. कुरु-पाण्डवों, व्रज व द्वारिका के यादवों की परस्पर भेंट
150. मुनिसमूह का श्रीकृष्ण से संवाद तथा कुरुक्षेत्र में वसुदेवजी का यज्ञ
151. जरासंध द्वारा कैद किए गए राजाओं का सहायता हेतु द्वारिका दूत भेजना व नारदजी का श्रीकृष्ण को युधिष्ठिर की यज्ञेच्छा से अवगत कराना
152. युधिष्ठिर का राजसूय यज्ञ के निमित्त श्रीकृष्ण से परामर्श
153. जरासंध वध व पाण्डवों की दिग्विजय
154. राजसूय यज्ञ एवं शिशुपाल-वध
155. सौभपति शाल्व का द्वारिका पर आक्रमण
156. प्रद्युम्न-शाल्व युद्ध
157. श्रीकृष्ण-बलराम का द्वारिका गमन व शाल्व-वध
158. दुर्योधन की ईर्ष्या, दुर्योधन-शकुनि-संवाद
159. धृतराष्ट्र-दुर्योधन-संवाद
160. धृतराष्ट्र का पाण्डवों को हस्तिनापुर बुलाना व द्यूत-क्रीड़ा
161. द्रौपदी-चीर-हरण
162. अनुद्यूत
163. पाण्डव-वन-गमन
164. दंतवक्र व विदूरथ का वध
165. श्रीकृष्ण का काम्यक वन में पाण्डवों से मिलन
166. पौंड्रक-वध
167. श्रीकृष्ण का सत्यभामा के साथ द्रौपदी व पाण्डवों से मिलने जाना
168. वाणासुर-संग्राम व उषा-अनिरुद्ध-विवाह
5. उद्योग पर्व (पंचमांजलि)
169. पाण्डवों के अज्ञातवास की समाप्ति
170. अभिमन्यु-विवाह
171. यादवों व पांचालों का पाण्डवों को राज्याधिकार दिलाने हेतु विचार
172. दोनों पक्षों का सहायता-हेतु राजाओं को निमंत्रण भेजना तथा अर्जुन व दुर्योधन का द्वारिका जाकर श्रीकृष्ण से सहायता माँगना
173. पांचाल-पुरोहित का दूत-कर्म
174. संजय का उपप्लव्य जाना
175. उपप्लव्य में संजय-कृष्ण-संवाद
176. संजय का हस्तिनापुर लौटना और धृतराष्ट्र का शोक व विदुर का नीति-उपदेश
177. संजय का कुरु-राजसभा में पाण्डवों का संदेश सुनाना तथा कौरवों का विचार-विमर्श
178. संजय का व्यासजी के कहने पर राजा को श्रीकृष्ण की महिमा सुनाना
179. पाण्डवों का श्रीकृष्ण के साथ कौरवों के मंतव्य पर विचार-विमर्श
180. श्रीकृष्ण का संधि-प्रयास हेतु दूत-कर्म
181. श्रीकृष्ण के स्वागत हेतु राजा का विदुर आदि के साथ विचार करना
182. विदुर व कुन्ती से श्रीकृष्ण का मिलना व कृष्ण-कुन्ती-संवाद
183. दुर्योधन का आतिथ्य ठुकराकर श्रीकृष्ण का विदुर के घर भोजन करना
184. विदुरजी का भगवान को कौरव-सभा में जाने से रोकना
185. श्रीकृष्ण का कौरव-सभा में स्वागत
186. कौरव सभा में श्रीकृष्ण का भाषण
187. गांधारी का दुर्योधन को संधि हेतु समझाना
188. दुर्योधन का श्रीकृष्ण को वंदी बनाने का षड़यंत्र
189. सात्यकि का रोष व विदुरजी का राजा को श्रीकृष्ण की महिमा बताकर पुनः समझाना
190. श्रीकृष्ण का रोष व विराटरूप-दर्शन
191. कुन्ती से मिलकर श्रीकृष्ण का उपप्लव्य-प्रस्थान
192. मार्ग में भगवान का कर्ण से संवाद
193. युद्ध-निश्चय
194. युधिष्ठिर का सेना सुसज्जित करके कुरुक्षेत्र के लिए प्रस्थान करना
195. युधिष्ठिर का सेनापति-निर्धारण तथा बलरामजी का आगमन
196. दोनों सेनाओं का कुरुक्षेत्र में आमने-सामने होना
6. प्रबोध पर्व (षष्टमांजलि)
197. व्यासजी का संजय को दिव्य-दृष्टि देना
198. अर्जुनविषादयोग
199. सांख्ययोग
200. कर्मयोग
201. कर्मसन्यासयोग
202. सन्यास योग
203. ध्यान योग
204. ज्ञानविज्ञानयोग
205. अक्षरब्रह्मयोग
206. राजविद्यायोग
207. विभूतियोग
208. विश्वरूपदर्शन योग
209. भक्तियोग
210. क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
211. गुणत्रयविभागयोग
212. पुरुषोत्तमयोग
213. दैवासुरसंपत्तिविभागयोग
214. श्रद्धात्रयविभागयोग
215. मोक्षसन्यासयोग
7. जय पर्व (सप्तमांजलि)
216. युद्धारम्भ में युधिष्ठिर का भीष्मादि वृद्धों को प्रणाम करके विजय का आशीर्वाद लेना
217. युद्ध का आरम्भ
218. शल्य द्वारा उत्तर का वध तथा भीष्म का श्वेत पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग
219. भीष्म द्वारा अपनी सेना का विनाश देख युधिष्ठिर का हताश होना और श्रीकृष्ण का उन्हें समझाना
220. अर्जुन द्वारा अपनी सेना का विनाश विध्वंस होते देखकर दुर्योधन का भीष्मजी को प्रेरित करना
221. भीष्मजी का श्रीकृष्ण को अस्त्र उठाने पर विवश करने की प्रतिज्ञा करना
222. श्रीकृष्ण का चक्र धारण करके भीष्मजी की ओर दौड़ना
223. भीम द्वारा आठ धृतराष्ट्रपुत्रों का वध तथा समाचार मिलने पर गांधारी का शोक
224. भाइयों की मृत्यु से आहत दुर्योधन का भीष्मजी को पुनः प्रेरित करना और कर्ण को युद्धभूमि में बुला लेने की बात कहना
225. भीष्मजी की महाविनाश की प्रतिज्ञा और शिखण्डी को सामने न आने देने का दुर्योधन से आग्रह
226. भीष्मजी का शरीर त्यागने का विचार करना
227. अपनी सेना का विनाश देखकर युधिष्ठिर का शोक प्रकट करना और भगवान का उन्हें भीष्मजी से विजय-आशीर्वाद लेने की सलाह देना
228. श्रीकृष्ण तथा भाइयों सहित युधिष्ठिर का भीष्मजी के पास जाना
229. भीष्मजी का पश्चात्ताप, श्रीकृष्ण की प्रशंसा करना और अर्जुन के वाणों से प्राण त्यागने का निश्चय करना
230. भीष्मजी का अंतिम-दिन का युद्ध एवं शरशय्या-ग्रहण
231. दुर्योधन का कर्ण को संदेश देकर युद्धभूमि में बुलाना
232. द्रोण का सेनापतित्व
233. द्रोणाचार्य की युधिष्ठिर को वंदी बनाने की प्रतिज्ञा
234. आचार्य की प्रतिज्ञा विफल होने पर सुशर्मा का अर्जुन को युद्ध में अन्यत्र उलझाए रखने का निश्चय
235. अर्जुन का संशप्तकों तथा गोप (नारायणी) सेना से युद्ध
236. द्रोणाचार्य का पांचालों के साथ युद्ध
237. राजा भगदत्त का युद्ध और अर्जुन द्वारा उसका वध
238. दुर्योधन का गुरु द्रोण के प्रति उपालम्भ
239. अर्जुन को संशप्तकों से युद्ध करने के लिए जाता देख द्रोणाचार्य का चक्रव्यूह-निर्माण व अभिमन्यु की वीरता
240. जयद्रथ का पाण्डवों को व्यूह में प्रवेश करने से रोक देना
241. अभिमन्यु के युद्ध-प्रहार से विचलित दुर्योधन का युद्धभूमि से पलायन करना व उसके पुत्र लक्ष्मण का अभिमन्यु के हाथों मारा जाना
242. दुर्योधन का अभिमन्यु को घेरकर मार डालने का आदेश
243. अभिमन्यु वध
244. अभिमन्यु की मृत्यु पर युधिष्ठिर व पाण्डवों का शोक
245. पुत्र-शोक में अर्जुन द्वारा जयद्रथ-वध की प्रतिज्ञा
246. अर्जुन की प्रतिज्ञा सुनकर जयद्रथ का युद्धभूमि त्यागने का निश्चय तथा द्रोणाचार्य का उसे आश्वासन देकर रोकना
247. सुभद्रा आदि का विलाप तथा श्रीकृष्ण का उन्हें समझाना
248. द्रोणाचार्य द्वारा कमलव्यूह अंतर्गत सूचीव्यूह का निर्माण
249. युधिष्ठिर का सात्यकि को अर्जुन की खोज में भेजना
250. देर हुई देखकर भीमसेन का अर्जुन की खोज में जाना
251. भीम द्वारा द्रोणाचार्य का रथ-भंजन तथा अनेक धृतराष्ट्रपुत्रों का वध
252. भीमसेन और कर्ण का युद्ध तथा कर्ण की पराजय
253. भीमसेन द्वारा पुनः अनेक धृतराष्टपुत्रों का वध
254. भीम द्वारा उनके साठ पुत्रों के मारे जाने का समाचार पाकर धृतराष्ट्र व गांधारी का शोक करना
255. भूरिश्रवा का सात्यकि द्वारा वध
256. जयद्रथ की रक्षा हेतु दुर्योधन का कर्ण आदि योद्धाओं को प्रेरित करना
257. अनेक महारथियों से अर्जुन का युद्ध और जयद्रथ का वध
258. रात्रि-युद्ध
259. कर्ण का प्रलाप तथा कृपाचार्य व अश्वत्थामा द्वारा उसका उपहास
260. श्रीकृष्ण के कहने पर अर्जुन द्वारा घटोत्कच को युद्ध के लिए प्रेरित करना
261. घटोत्कच का भयंकर युद्ध तथा दुर्योधन के आग्रह पर कर्ण का उस पर वासवी-शक्ति का प्रयोग करना
262. द्रोणाचार्य द्वारा राजा द्रुपद का वध
263. ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने पर ऋषियों का गुरु द्रोण को धिक्कारना और युद्ध से विरत होने का आग्रह करना
264. भीमसेन का द्रोणाचार्य के कृत्यों की भत्र्सना करना पश्चात् धृष्टद्युम्न द्वारा द्रोणाचार्य का वध
265. अश्वत्थामा द्वारा नारायणास्त्र का प्रयोग तथा श्रीकृष्ण की युक्ति से उसका निवारण
266. कर्ण का सेनापतित्व
267. कर्ण का दुर्योधन से राजा शल्य को उसका सारथी बनाने का आग्रह
268. भीमसेन द्वारा अनेक धृतराष्ट्रपुत्रों का संहार
269. कर्ण द्वारा घायल होकर राजा युधिष्ठिर का शिविर में लौटना
270. युधिष्ठिर की कुशल जानने हेतु श्रीकृष्ण व अर्जुन का शिविर में आना
271. कर्ण को जीवित जानकर राजा का अर्जुन को धिक्कारना, अर्जुन का राजा को मारने हेतु उद्यत होना तथा श्रीकृष्ण द्वारा संकट का समाधान
272. अर्जुन का युद्धभूमि में लौटना तथा भीमसेन द्वारा दुःशासन का वध व उसके अन्य भाइयों का संहार
273. अर्जुन द्वारा कर्णपुत्र वृषसेन का वध
274. कर्ण-अर्जुन-युद्ध
275. कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धँसना
276. धर्म की दुहाई देने पर श्रीकृष्ण का कर्ण को फटकारना
277. कर्ण का वध
278. भीमसेन और अर्जुन द्वारा कौरव-सेना का संहार
279. राजा शल्य का सेनापतित्व
280. शल्य वध
281. दुर्योधन का व्यास-सरोवर में जाकर छिपना तथा युधिष्ठिर आदि का वहाँ जाकर उसे ललकारना
282. दुर्योधन का भीमसेन से गदा-युद्ध करने का निश्चय तथा बलरामजी का आगमन
283. कुरुक्षेत्र में दुर्योधन और भीमसेन का गदा-युद्ध
284. दुर्याेधन-उरु-भंग
285. पांचालों का द्रौपदीपुत्रों सहित अपने शिविर में जाना तथा पाण्डवों का ओघवती के तट पर विश्राम करना
286. श्रीकृष्ण का गांधारी को सांत्वना देने हस्तिनापुर जाना
287. द्रोणपुत्र द्वारा सोते हुए द्रौपदी-पुत्रों व पांचालों का वध
288. दुर्योधन की मृत्यु व अश्वत्थामा का पराभव
289. राजा धृतराष्ट्र का कुरुक्षेत्र आना, रणभूमि की वीभत्सता व स्त्रियों का विलाप
290. गांधारी की व्यथा व उसका श्रीकृष्ण को शाप देना
291. वीरगति प्राप्त योद्धाओं की अंत्येष्टि-क्रिया
292. युधिष्ठिर का शोक
293. श्रीकृष्ण व व्यासदेव द्वारा युधिष्ठिर का शोक-निवारण
8. शान्ति पर्व (अष्टमांजलि)
294. युधिष्ठिर का राज्यारोहण
295. भीष्मजी का राजा युधिष्ठिर को राजनीति का उपदेश देना
296. भीष्मजी का देह-त्याग
297. युधिष्ठिर का पुनः विषादग्रस्त होना तथा श्रीकृष्ण और व्यासजी का उन्हें प्रायश्चित-स्वरूप अश्वमेध-यज्ञ करने का परामर्श देना
298. श्रीकृष्ण का राजा युधिष्ठिर को उपदेश
299. श्रीकृष्ण का द्वारिकागमन
300. श्रीकृष्ण का परिजनों को भारत-युद्ध का हाल सुनाना
301. श्रीकृष्ण का हस्तिनापुर पुनरागमन
302. मृत बालक परीक्षित का जन्म व भगवान का उसे पुनर्जीवन देना
303. युधिष्ठिर का अश्वमेध-यज्ञ
304. श्रीकृष्ण का द्वारिका लौटना तथा अनिरुद्ध-रुक्मवती विवाह व वज्रनाभ का जन्म
305. सुदामा-चरित
306. भगवान श्रीकृष्ण का उद्धव को भागवत-धर्म का उपदेश देना
307. श्रीकृष्ण-कथा का महात्म्य
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