हमारा उद्देश्य महाकाव्य श्रीकृष्णचरितसुधा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के पावन एवं प्रेरणादायी चरित्र को जन-जन तक पहुँचाना है। यह वेबसाइट इसी उद्देश्य की पूर्त्ति के लिए बनाई गई है। आप विद्वान पाठकों से अनुरोध है कि इस पुुनीत कार्य में हमारा सहयोग करें और श्रीकृष्णचरितसुधा का अध्ययन करने के साथ ही इसके अखण्ड-पाठ आदि के आयोजन के द्वारा जन-मानस में इसका प्रचार-प्रसार करने में सहयोग करें। इसकी भाषा गोस्वामी जी द्वारा रचित रामचरितमानस की तरह ही अवधी-हिन्दी है, जो सुबोध और गेय है।
ग्रंथ भावार्थ सहित उपलब्ध है तथा इसका छठा अध्याय प्रबोधपर्व, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के सम्पूर्ण अठारह अध्याय दोहा-चौपाई शैैैली में वर्णित हैं, अलग से मात्र 110/-रू0 में उपलब्ध है।
सम्पूर्ण महाकाव्य श्रीकृष्णचरितसुधा (भावार्थ सहित), जिसकी पृृृृृृष्ठ-सं0- 1246 है, मात्र 1050/-रू0 में इस वेबसाइट के माध्यम से डाक द्वारा मँगा सकते हैं। आप से प्राप्त सहयोग राशि का उपयोग श्रीकृष्णणचरितसुधा के आगे प्रकाशन में किया जायेगा। हमें विश्वास है कि इस पुुुुनीत कार्य में हमें आप सबका सहयोग प्राप्त होगा। जय श्रीकृष्ण